बीजिंग: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग में होर्मुज स्ट्रेट पर नौवहन का बाधित होना दुनिया के तमाम देशों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने की वजह से दुनिया के कई देशों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने होर्मुज स्ट्रेट बनी हालातों से पल्ला झाड़ लिया है। ऐसी स्थिति में अब चीन आगे आया है। चीन की ओर से गुरुवार को कहा गया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता बहाल करने की जरूरत के बारे में सभी पक्षों से बातचीत कर रहा है और सभी को इस दिशा में काम करना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "हमारा मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के पानी में जल्द से जल्द युद्धविराम के साथ-साथ शांति और स्थिरता की बहाली अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एक साझा इच्छा है। सभी पक्षों को इस दिशा में काम करना चाहिए।" उन्होंने कहा, "चीन सभी पक्षों के साथ बातचीत और तालमेल बनाए हुए है।"
'संघर्ष किसी के हित में नहीं'
माओ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में रुकावट की असली वजह अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई गैर-कानूनी सैन्य कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि इस इलाके में सुरक्षा बहाल करने का तरीका दुश्मनी खत्म करना है। माओ ने कहा, "सैन्य तरीकों से इस मुद्दे का मूल रूप से हल नहीं निकल सकता, और संघर्ष का बढ़ना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है।"
ट्रंप ने खड़े किए हाथ
गौरतलब है कि, चीन और पाकिस्तान इस सप्ताह एक 5 सूत्रीय प्रस्ताव को बढ़ावा देने पर सहमत हुए हैं, जिसमें जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करने और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को सुरक्षा की गारंटी देने की मांग शामिल है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अमेरिका की नहीं है। अमेरिका का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
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